साधना की शख्सियत-6

... और बादलों का अब गहराता साया न्यूज भारत, सिलीगुड़ीः साधना की परिकल्पना एक दिन में नहीं होती, ये बचपन से आसमान में उड़ने की परिकल्पना होती है। सपनों के इस उड़न को रोकने या आसमान की उचाईयों छूने की क्षमता स्वयं पर ही पर निर्धारित होती है। शैशवकाल के सपनें अगर किसी कारणवस अवरुद्ध हो जाते है, बावजूद इसके अगर समय और मौका मिले तो जीवन के किसी भी काल में सपनों की उस उड़ान को हासिल करने में तमाम बाधाएं, परंतु वह पूरे जरूर होते हैं और इसी को कहते हैं " साधना की शख्सियत"

साधना की शक्शियत-5

न्यूज भारत, सिलीगुड़ीः काव्य, लेखन, संगीत एसी विधा है जिसमें साधना की जरूरत होती है। मंजिल से मुकाम तक पहुंचना बहुत कठिन होता है। लेकिन अगर व्यक्ति अगर चाह ले तो राह मिल जाती है। कोई अपनी रचनाओं के लिए सही प्रयास करता है तो आगे चलकर " साधना की शक्शियत" से ही पहचान बनाने में सफल होता है। सिलीगुड़ी में भी प्रतिभाओं की कमी नहीं है, बस जरूरत है संवारने की इसी तरह से एक आवाज सामने आया है "प्रतीक गुप्ता" बचपन से आवाज की दुनिया में साज बैठा रहा है, परंतु सफलता के लि

साधना की शक्शियत-4

न्यूज़ भारत, सिलीगुड़ीः किसी में काव्यों के प्रति रूचि अगर सच्ची निष्ठा हो तो प्रकाशित होने या ना होने से कोई फर्क नहीं रचनाओं की अपनी विराशत रचना और रचनाओं के संग्रह से ही उसकी लानन और सच्ची निष्ठा ही उस रचनाकार के " साधना की शक्शियत" होती है चाहे कहीं भी लिखी गई हो। इसी ऊहापोह की जिंदगी में एक गृहिणी " अनीता तिवारी" का है। बचपन सकता पठन-पाठन में रूचि रही जो कही स्थान तो नहीं मिला परंतु वे अपनी इस विधा को अपने रोम रोम में बसाया और आज भी वे अपनी रचनाओं को ड

साधना की शक्शियत-3

न्यूज़ भारत, सिलीगुड़ीः प्रतिभाओं को बेहतर निखार लाने के लिए प्रतिभागियों को सच्ची निष्ठा रखना ही, उसकी कामयाबी का माना जाना चाहिए, ये कोई जरूरी नहीं उसकी हर रचना बेहतर हो, परंतु अगर लगन और काव्यों के प्रति उसकी रूचि और कम संसाधनों के बीच में निरंतर प्रयास करना ही उसकी सच्ची साधन है। इसी तरह का प्रयास हैं "रिंकी गुप्ता" पेशे से वकालत की शुरुआत करने के साथ साथ काव्य लेखन में अपना योगदान दे रही है, उनकी रचनाओं को तमाम पत्र पत्र

साधना की शख्सियत-2

जब याद तुम्हारी आती है ... न्यूज भारत, सिलीगुड़ी (दार्जिलिंग): एक कहावत है जहां ना पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि,। इसी कल्पनाओं का सागर होता है, काव्य की रचनाओं को लिखना और पठनीयता को बरकरार रखना। रचनाओं को रचनात्मक बनाने के कवि, लेखकों को बहुत साधना करनी होती है, इसी साधना के दौर गुजरने वाली बंगाल के सिलीगुड़ी की, अमरावती गुप्ता हैं। "आठवी क़क्षा में थी तभी से लिखने का शौक हुआ, तबसे लिख रहे थे, स्कूळ, कॉलेज के पत्र, पत्रिकाओं में रचना छपती थी। फिर एक दो

भावे सावन के रिमझिम फुहार पिया आईल बहार पिया ना, पर झूमे लोग

10 दिवसीय कार्यशाला का नि:शुल्क आयोजन कर रहा गुंजन, दूर दूर के छात्र ले रहे भाग न्यूज भारत, गोरखपुर: दुर्गा मंदिर अशोक नगर में स्वर गुंजन कजरी कार्यशाला में मोहन पांडेय भ्रमर जी द्वारा रचित मिर्जापुरी कजरी जिसके बोल थे। ' भावे सावन के रिमझिम फुहार पिया आइल बहार पिया ना' एवं रमेश सिंह दीपक जी के द्वारा रचित रक्षाबंधन गीत 'आइल आइल राखी के तिउहार भईया परदेशी ना अइले' को अंतर्राष्ट्रीय लोकगायक राकेश उपाध्याय ने प्रशिक्षण ले रहे कलाकारों को बड़े मनोयोग से स

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