महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन के प्रमुख तुकाराम मुंढे की ओर से खुले और बिना सील वाले खाद्य तेल की बिक्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई की पहल निश्चित रूप से स्वागत योग्य है। हाल में महाराष्ट्र FDA ने खुले खाद्य तेल की बिक्री पर रोक लगाने और आपूर्ति शृंखला में जवाबदेही तय करने की दिशा में कड़े कदम उठाए हैं। उद्देश्य साफ है—मिलावट, असुरक्षित भंडारण और उपभोक्ता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ पर लगाम। लेकिन इस कार्रवाई के साथ कुछ बुनियादी सवाल भी उठने चाहिए। ये स�
संपादकीय
नागासाकी की त्रासदी और परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व की अनिवार्यता
नागासाकी की त्रासदी और परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व की अनिवार्यता 9 अगस्त 1945 मानव इतिहास की उन तारीखों में से है जिन्हें केवल कैलेंडर पर दर्ज घटना के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह वह दिन था जब विज्ञान की अभूतपूर्व शक्ति ने मानव सभ्यता के सामने अपनी सबसे भयावह संभावनाओं में से एक को प्रकट किया। सुबह 11 बजकर 2 मिनट पर अमेरिकी बी-29 विमान बॉकस्कार ने नागासाकी पर प्लूटोनियम-आधारित परमाणु बम गिराया। बम का नाम “फैट मैन” था। नागासाकी उस सम�
भारत छोड़ो आंदोलन: स्वतंत्रता संघर्ष की अंतिम बड़ी जनक्रांति और कुछ रोचक पहलू - डॉ. शैलेश शुक्ला
भारत छोड़ो आंदोलन: स्वतंत्रता संघर्ष की अंतिम बड़ी जनक्रांति और कुछ रोचक पहलू - डॉ. शैलेश शुक्ला भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का वह निर्णायक अध्याय था, जिसने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष को एक नए और अंतिम बड़े चरण में पहुंचा दिया। आम तौर पर इसे महात्मा गांधी के “करो या मरो” के आह्वान और 9 अगस्त 1942 की गिरफ्तारियों के साथ याद किया जाता है, लेकिन इसकी कहानी इससे कहीं अधिक व्यापक और रोचक है। यह केवल कांग्रेस द्वारा चलाया गया कोई सामान्य राजनी
मोबाईल क्रांति में हिंदी की बढ़ती स्वीकार्यता
लेखक, डॉ. शैलेश शुक्ला वरिष्ठ लेखक, पत्रकार, साहित्यकार एवं वैश्विक समूह संपादक, सृजन संसार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका समूह हिंदी भाषा और मोबाइल तकनीक गाँव से वैश्विक मंच तक "हिंदी भाषा और मोबाइल तकनीक गाँव से वैश्विक मंच तक" वर्तमान समय में भाषा, तकनीक और सामाजिक बदलाव के गहन अंतर्संबंध का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। भारत में मोबाइल तकनीक के तेज़ी से हुए प्रसार ने हिंदी भाषा को न केवल नए उपयोगकर्ताओं तक पहुँचाया है, बल्कि इसे शिक्षा, पत्रकारिता,
AI ही बनेगा लोगों के लिए खतरा
• एआई पर अत्यधिक निर्भरता छात्रों के सीखने और महत्वपूर्ण सोच कौशल के लिए हानिकारक हो सकती है • छात्रों के लिए एआई को समझना कठिन और समय लेने वाला हो सकता है, जिससे उन्हें इससे मिलने वाले लाभ सीमित हो जाते हैं। आकाश शुक्ल एनई न्यूज भारत,सिलीगुड़ी: AI पर अत्यधिक निर्भरता हानिकारक हो सकती है। तकनीकी विफलताएं या खराबी सीखने की प्रक्रिया को बाधित कर सकती हैं, और प्रौद्योगिकी पर अत्यधिक निर्भरता महत्वपूर्ण सोच और समस्या-समाधान कौशल को कम कर सकती है। पारं
कृषि संशोधन बिल 2020
कितने ही शब्दों और मशीनों का अविष्कार हो जाए, किंतु व्यक्ति ही सर्वोच्च है । उसकी मानसिकता ही सर्वोच्च है । कृषि संशोधन बिल सही है या गलत है, यह सटीक रूप से कहना निरर्थक है । विश्व में दो प्रकार की विचारधारा समानांतर कार्य करती हैं, एक है पूंजीवादी विचारधारा और दूसरी है समाजवादी विचारधारा । यह दोनों परस्पर विरोधाभासी हैं । यह बिल भी इन दोनों विचारधाराओं के आधार पर मापा जा रहा है । पूंजीवादी सोच इसे सही ठहरा सकती है, किंतु समाजवादी सोच इसे अन्या�
तय और निश्चय में रूठों का पेंच
फिलगुड व शाईनिंग इंडिया का राह पर कही बंगाल चुनाव तो नहीं ? दूसरे दलों के नेताओं को पार्टी तरजीह, भारी पड़ सकता है भाजपा पर केन्द्र के जोरदार प्रयास पर पानी फेर सकतें हैं पुराने रूठे कार्यकर्ता दल के पदों पर भगवा रंग व हिंदुत्व रंग के और गाढ़ा करने जरूरत पवन शुक्लं, सिलीगुड़ी ‘राज्यं की ममता सरकार का जाना तय ही नहीं निश्चयय समझ लिजीए’ शनिवार को बंगाल दौरे पर आए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीरय अध्यकक्ष जेपी नडडा ने कही है। लेकिन पुराने कार्यकर्त�
सार्जेंट का द्रोह और गांधी नीति
भारतीय इतिहास में गांधी, शब्द वह है जो चिर परिचित शब्द है। गांधी को ना केवल आजादी में योगदान के रूप में याद रखा जाना चाहिएl बल्कि उनका व्यक्तित्व भी अद्भुत रहें है, वह विश्लेषण के लिए आधार प्रस्तुत करता है! मुख्य रूप से राजनीतिक विश्लेषण हेतु। गांधी की राजनीतिक पकड़ और दृष्टि विशिष्ट थी । उन्हें एक राजनीतिज्ञ के रूप में भी पढ़ा जा सकता है। गांधी की यात्रा की शुरुआत भारत की धरती से ना होकर साउथ अफ्रीका की जमीन से हुई। गांधी अपनी पढ़ाई खत्म करके भारत जरूर आए,
चाय की प्याली में स्वाद, जीवन में गमों का तूफान
चाय बगानों की स्थिति हुई बेहतर, पर मजदूर आज भी गुलामों की तरह आदिवासी दिवस का कार्यक्रम सिर्फ छलवा, संवेदनाओं पर चल रहा जीवन ''दुनियां के सबसे बेहतर चाय बगानों में दार्जिलिंग है। चाय दुनियां के सबसे बेहतरीन पेयपदार्थ में स्वास्थ्य वर्धक मानी भी जाती है। परंतु चाय की प्याली स्वाद भरने वाले चाय बगान के मजदूर की दशा आज भी गमों के दौर से गुजर रही है। आजादी के बाद आज भी चाय बगान में काम करने वाले आदिवासी आज भी अपने जीवन के जंग को बड़े ही दर्द भरे लम�
यह कैसा लाकडाउन....?
''कोरोना संकट से निपटने को बने ठोस नियम, राजनैतिक पराकाष्ठा से उपर उठे अधिकारी.?। कोरोना से बिगड़ते हालात को देखते सभी को अपनी संवेदना से जोड़ना होगा.? इसमें चाहे प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस बल के जवान, व्यापारी या हर आम और खास। जरूरत सभी को एक साथ मिलकर इस आपदा से निपटने की है। वहीं इस बेकाबू होते कोरोना संक्रमण के संकट राजनितिक दलों को भी थोडा राजैतकि पराकाष्ठा से उपर उठकर काम करने की जरूरत है।'' लाकडाउन में पुलिस के हाथ बंधे..? अगर पहले लाकडाउन की �



