भोजपुरी हमारी लोक-आत्मा की धड़कन है, पीढ़ियों तक जीवित रखना होगा” प्रो.: राम नारायण तिवारी

HIGHLIGHTS मातृभाषा दिवस पर “भाई”ने किया आचार्य मुकेश का सम्मान “भाषा केवल शब्द नहीं, बल्कि हमारी अस्मिता का जीवंत स्वर है”: प्रो. अजय  शुक्ला “मातृभाषा में शिक्षा से ही सांस्कृतिक आत्मविश्वास सुदृढ़ होता है”: प्रो दीपक प्रकाश त्यागी एनई न्‍यूज भारत, गोरखपुर (यूपी) विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BHAI) के तत्वावधान में “मातृ भाषा भोजपुरी: अस्मिता, अस्तित्व आ भविष्य” विषय पर एक गरिमामय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक�

कविता से गूंजी सिलीगुड़ी की महिला काव्य मंच का ऐतिहासिक आयोजन

• कविताओं से सजा महिला काव्य मंच का पश्चिम बंगाल इकाई सम्मेलन • सिलीगुड़ी में 50 से अधिक कवियों की गूंज, सुबह से शाम तक कविता का उत्सव एनई न्यूज भारत,सिलीगुड़ी : महिला काव्य मंच पश्चिम बंगाल इकाई द्वारा सिलीगुड़ी में आयोजित कवि सम्मेलन एक ऐतिहासिक आयोजन साबित हुआ। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चले इस कार्यक्रम में देशभर के 50 से अधिक कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में संचित देवनाथ, सविता मिश्र�

सृजन से संवाद तक का आयोजन बच्‍चों की प्रतिभा उभारने की पहल

HIGHLIGHTS पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की पहल से पश्चिमबंग हिंदी अकादमी द्वारा "कविता की शक्ति का कार्य्रकम संपन्‍न नई प्रतिभाओं के विकास को समुचित अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काव्य संध्या आयोजित: दिलीप दूगड़ काव्य संध्या में नारायणा स्कूल, डीपीएस, सिलीगुड़ी एवं हिंदी बालिका विद्यापीठ के बच्‍चे रहे अव्‍वल एनई न्‍यूज भारत, सिलीगुड़ी पश्चिमबंग हिंदी अकादमी के द्वारा आयोजित सृजन से संवाद तक शीर्षक से एक काव्य संध्या का आयोजन सिलीगुड़ी के सूचना �

"नादान परिंदे" एक यात्रा की एक नई उड़ान

HIGHLIGHTS चमन भारतीय का साहित्यिक प्रयास मात्र एक लेखन नहीं, बल्कि एक साधना है।  जो शब्दों के माध्यम से आशाओं, आदर्शों और उद्देश्यों को जीवन देती है। उनकी रचनाएँ किसी उपदेश की तरह नहीं, बल्कि मित्रवत संवाद की तरह पाठकों के हृदय से बात करती हैं। यही कारण है कि उनकी लेखनी न केवल पढ़ी जाती है, बल्कि महसूस की जाती है। चमन की लेखनी में जीवन की सच्चाइयाँ, संघर्षों की ज्वाला और भावनाओं की सौम्यता एक साथ प्रवाहित होती है "नादान परिंदे" कहानी संग्रह नहीं, यह उन सपन�

आख़िर क्यों: महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों पर एक संवेदनशील दृष्टिकोण

समाज में जब भी कोई अपराध होता है, तो नज़रें अक्सर पुरुषों की ओर उठती हैं। लेकिन जब वही हिंसा, वही छल, वही अमानवीयता किसी महिला द्वारा की जाती है, तो समाज कुछ क्षण के लिए स्तब्ध रह जाता है। क्या पीड़िता बनने की पीड़ा ही कभी किसी को अपराधी बनने की ओर ले जाती है? क्या बदलते सामाजिक ढाँचे ने स्त्रियों की संवेदनाओं को भी कठोर बना दिया है? अर्चना शर्मा की यह कविता "आख़िर क्यों" इन्हीं सवालों से जूझती है—ना सिर्फ़ जवाब ढूंढती है, बल्कि पाठक के मन में गूंजती एक गहरी

भड़क उठी चिंगारी : अर्चना शर्मा

परिचय:  मैं आर्चना शर्मा,प्रधानाचार्या हिन्दी बालिका विद्यापीठ स्कूल, सिलीगुड़ी की, आज एक ऐसी पीड़ा को स्वर देना चाहती हूँ, जो केवल एक देश की नहीं, बल्कि समस्त मानवता की त्रासदी है  जब सीमा के उस पार से अंधेरे ने सर उठाया,भारत माँ के वीरों ने लहू में जुनून जलाया। यह कोई साधारण युद्ध न था, यह न्याय की पुकार थी— एक चिंगारी जो वर्षों से सुलग रही थी, अब शोला बनकर दुश्मन की अंधेर नगरी में भड़क उठी। यह कविता उस साहस, उस बलिदान, और उस न्याय की गाथा है, जो भ�

आतंक के साये में शांति की पुकार

परिचय: मैं आर्चना शर्मा,प्रधानाचार्या हिन्दी बालिका विद्यापीठ स्कूल, सिलीगुड़ी की, आज एक ऐसी पीड़ा को स्वर देना चाहती हूँ, जो केवल एक देश की नहीं, बल्कि समस्त मानवता की त्रासदी है — आतंकवाद। यह कविता उन मासूम जिंदगियों को समर्पित है, जिन्हें आतंक ने छीन लिया। आतंक देख घटना पहलगाम की, आंखों से बहता पानी।  काले अक्षर में लिख दो, आतंकी क्रूर कहानी।  मजहब का नंगा नाच,  आज मचा है देश में।  घुसे हुए हैं गद्दार यहां, आतंकियों के भेष में।  है कह�

न छूटे बच्चों के हाथ से कलम का साथ, यही सोच नहीं थमते मां के हाथ

साधना की शख्सियत 02-01 आकाश शुक्ल, सिलीगुड़ी साहित्‍य की कल्‍पना किसी जाती-धर्म या किसी भाषा या किसी एक समाज की नहीं होती। भारत का साहित्‍य एक ऐसी विधा है जो गांव की गलियाें व शहरों की चकाचौध में प्रतिभाएं सामने आती रहती है। लेकिन उत्‍तर बंगाल के चाय बागानों में जो प्रतिभाएं है उसे सामने लाने की जरूरत है। कड़क चाय सोधी सुगंध के बगानों से जो साहित्‍य और काव्‍य की रसधारा निकल रही है , जरूरत है तो उन प्रतिभाओं को सामने लाने की। एनई न्‍यूज भारत उन्‍ही सपन�

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से शुरू हुआ पाक्योंग साहित्‍य महोत्‍सव

सिक्किम राज्य 50वें वर्ष में प्रवेश, पाक्योंग साहित्य महोत्सव 2024 का पहला दिन संपन्न आज दूसरा दिन एनई न्‍यूज भारत, गंगटोक सिक्किम में नेपाली साहित्‍य को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पाक्योंग साहित्य महोत्सव 2024 की शुरूआज शनिवार से शुरू हुआ। वहीं अरितार के लाम्पोखारी झील में पहला दिन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। जबकि पाक्योंग जिले के जिला प्रशासनिक केंद्र (डीएसी) द्वारा आयोजित साहित्य महोत्सव, सिक्किम के राज्य बनने के 50वें वर्ष का जश्न मनाता है, साथ ही बेटी बचाओ,

संघर्ष से लेकर कामयाबी तक डाॅ.भीखी प्रसाद वीरेन्द्र

एनई न्यूज भारत सिलीगुड़ी: "जब गुड़ गजन सहे तब मिसरी नाम धराय" अर्थात अत्यंत पीड़ा सहने के बाद ही भाग्योदय होता है। मेरी मम्मी की ये बात मैं बचपन से ही सुनती आई हूँ पर बचपना खुद पर इस कदर हावी था कि सही मायने को कभी समझ न सकी और हँसकर माँ को कह देती थी- बिस्किट फैक्टरी वाले की बेटी हो न तुम मम्मी बिस्किट , चाॅकलेट , मिश्री के अलावा कोई और बात तो तुम करोगी नहीं। काश! नानाजी होते तो उनसे तेरी शिकायत करती इतना कहकर खूब ठहाके लगाया करती थी। पर सच तो ये है कि माँ कभी गलत �

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