कीट अभिलेखागार और थिएटर की पुस्तक 'पालर' को मुक्ति मिलती है
एनई न्यूज भारत, गोरखपुर: डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने "कीट विज्ञान सिद्धांत एवं अनुप्रयोग" पुस्तक का लोकार्पण किया। लेखक प्राणि विज्ञान विभाग के प्रोफेसर विनय कुमार सिंह और सेंट जेवियर्स कॉलेज,रांची की सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रिया श्रीवास्तव हैं।
डीडीयू की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि यह पुस्तक शोधकर्ताओं और कीटविज्ञानियों के लिए उपयोगी होगी, उन्होंने लेखकों की कड़ी मेहनत की प्रशंसा की और उन्हें आगे के शोध और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया। प्रो. वी.के सिंह ने कहा कि पुस्तक में परमाणु प्रोटीन कोडिंग पर आधारित नए वर्गीकरण और मेजबान-पौधे प्रतिरोध रक्षा तंत्र पर चर्चा शामिल है, जिसमें सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुप्रयोगों को जोड़ने वाले 10 अध्याय हैं। लॉन्च के समय अन्य संकाय सदस्य भी मौजूद थे।
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नाथपंथ विश्वकोश का निर्माणकार्य का शुभारंभ
एनई न्यूज भारत,गोरखपुर : महायोगी गुरु गोरखनाथ शोध केंद्र, गोरखपुर विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो.पूनम टंडन के मार्गदर्शन में नाथपंत विश्वकोश परियोजना आरंभ। डॉ. कुशल नाथ मिश्र ने घोषणा की कि विश्वकोश को सात खंडों में विभाजित किया जाएगा, जिसमें परंपराएं, शब्दावली, इतिहास, प्रमुख ग्रंथ, दार्शनिक अवधारणाएं, मंदिर, पूजा पद्धतियां, पोशाक और नाथपंत के वैश्विक परिप्रेक्ष्य को शामिल किया जाएगा। इसके संपादन एवं लेखन में प्रतिष्ठित विद्वान अपना योगदान देंगे। विषय विशेषज्ञों की सूची भी फाइनल कर ली गई है।
इस विश्वकोश के प्रथम भाग में नाथ सम्प्रदाय की मूल अवधारणा, प्रवर्तन, इतिहास, दार्शनिक मान्यताएँ, सिद्ध आचार्य, संत, महंत, अध्येता आदि, द्वितीय भाग में नाथ सम्प्रदाय मूल ग्रंथ, गोरखनाथ द्वारा लिखित संस्कृत एवं हिन्दी साहित्य, नाथ सम्प्रदाय से सम्बद्ध संस्कृत, हिन्दी, बांग्ला, मराठी, असमिया, गुजराती, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, नेपाली, पंजाबी, भोजपुरी भाषा में लिखित साहित्य, नाथ सम्प्रदाय से सम्बद्ध लोकगीत, कहावत, कहानी, नाटक तथा अन्य साहित्य, तृतीय भाग में नाथपंथ के दार्शनिक सिद्धांतों का व्यापक विश्लेषण, पारिभाषिक शब्दावली, सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत, सामाजिक-सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय एकता में नाथपंथ की भूमिका, चतुर्थ भाग में नाथ समुदाय के मठ, मंदिर, पुण्य क्षेत्र, डेरा, सरोवर, देश विदेश में नाथ सम्प्रदाय के स्थान, पंचम भाग में पतंजलि का योग दर्शन और गोरखनाथ का हठयोग दर्शन, समग्र अनुशीलन, नाथपंथ की साधना पद्धतियों का समग्र विश्लेषण, कुंडलिनी जागरण आदि का स्वरुप, विश्लेषण, षष्ठ भाग में नाथपंथ की उपासना पद्धति, कर्मकाण्ड, व्रत-उपवास, नाथपंथ के योगियों की दिनचर्या, जीवन-पद्धति, वेशभूषा, आहार-विहार, निशा भ्रमण, दीक्षा पद्धति का स्वरुप, नाथपंथ के योगियों का प्रशिक्षण, सप्तम भाग में विश्व धर्म दर्शन एवं नाथपंथ, नाथपंथ का देश-विदेश में प्रभाव-विस्तार आदि सम्मिलित है।