विद्यार्थी कक्षा से दूर और गूगल बाबा के निकट क्यों बने रहते हैं पड़ताल जरूरी : डॉ. अजय साव
एनई न्यूज भारत, सिलीगुड़ी
पश्चिमबंग हिंदी अकादमी द्वारा 'हिंदी भाषा-साहित्य का अकादमिक परिदृश्य और कौशल संवर्धन' विषय पर सिलीगुड़ी कॉलेज के तत्त्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आज पहला दिन संपन्न हुआ। सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर गौतम देब ने नई शिक्षा नीति को बाहर के देशों का कॉपी पेस्ट बताया और इसके संकटों का संकेत किया। आगे कहा कि इसके लिए स्कूल और कॉलेज दोनों स्तरों पर ओरियंटेशन द्वारा शिक्षक और विद्यार्थियों के लिए अकादमी परिदृश्य में कौशल संवर्धन को महत्व देने की जरूरत है। अकादमी के सदस्य दिलीप दूगड़ ने नई पीढ़ी के लिए संगोष्ठी का महत्व उद्घाटित किया। अकादमी के सदस्य डॉ. अजय कुमार साव ने विषय प्रवर्तन के दौरान चिंता प्रकट की कि विद्यार्थी कक्षा से दूर और गूगल बाबा के निकट क्यों बने रहते हैं ? इसकी वजह की पड़ताल की जानी चाहिए। साथ ही अध्ययन-अध्यापन के साथ प्रश्न-पत्र को एनोवेटिव बनाने की जरूरत है। माना जाता है कि भाषा-साहित्य का काम मनुष्य बनाना है, जिम्मेदार नागरिक बनाना है लेकिन इसके प्रति विद्यार्थियों में घट रही रुचि भाषा और साहित्य के लिए बहुत बड़ा संकट है। अकादमिक पात्रता के बावजूद रोजगार के लिए जरूरी योग्यता के अभाव को कौशल संवर्धन द्वारा ही दूर किया जा सकता है। 'बोर्ड ऑफ स्टडीज' को 'बोर्ड ऑफ एग्जाम' बनाकर रख देने से अकादमिक परिदृश्य में कौशल संवर्धन कभी भी सार्थक नहीं बन पाएगा। रही बात अंक अर्जित कर पास करने की तो इससे हम इनकार नहीं कर सकते कि नंबर गेम बना हुआ है अकादमिक परिदृश्य और दुखद है कि नंबर ही इसमें गोल है। आए दिन असफल होने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में पाठ्यक्रम को रुचिकर और प्रभावी बनाने के लिए तमाम कौशलों से साहित्यिक रचनाओं को अभिव्यक्त करने के तरीके ईजाद करने होंगे। साथ ही इंटर्नशिप को लेकर सुचिंतित योजना भी बनाई जाए।
बीज वक्तव्य रखते हुए लाल बाबा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार ने कहा कि भाषा में बसा साहित्य मनुष्यता को प्रयोजन बनता है जिसके प्रति स्किल्ड परिवेश बनाने की जरूरत है। भाषा विज्ञान, काव्यशास्त्र, अनुवाद जैसे विषयों पर कार्यशालाओं और संगोष्ठियों की नितांत जरूरत बनी हुई है। दुखद बात यह है कि जब विश्वविद्यालय में एग्जीक्यूटिव कमिटी की बैठक की जाती है तब कॉलेज से जुड़े मुद्दे वहां नदारद होते हैं। इसका खामियाजा स्नातक स्तर पर अकादमिक परिदृश्य को भुगतना पड़ता है। जरूरत है कि तमाम कौशलों का परिचय विद्यार्थी और शिक्षक दोनों को कराया जाए, ताकि पाठ्यक्रम रुचिकर बने। साथ ही रोजगार की दृष्टि में भाषा और साहित्य में निहित मूल्य का सार्थक इस्तेमाल भी हो पाए। सिलीगुड़ी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुजीत घोष ने कौशल को अकादमिक क्षेत्र में रुचि जगाने का एकमात्र जरिया बताया, वहीं सिलीगुड़ी कॉलेज के गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष जयंत कुमार कर ने भाषा-साहित्य के प्रयोजन को एकेडमिक परिदृश्य में निभाना जरूरी बताया। संगोष्ठी में मॉरीशस के महात्मा गांधी संस्थान के हिंदी विभाग की अध्यक्षा प्रोफेसर अलका धनपत ने कहां के कक्षा में साहित्यिक रचनाओं को नाट्य रूपांतरण द्वारा रुचिकर बनाया जाना चाहिए। बोलने के पहले सुनने के कौशल को गंभीरता से अर्जित करने की जरूरत है तभी वचन और लेखन द्वारा एकेडमिक परिदृश्य में जरूरी योग्यता उपलब्ध हो सकती है। आगे उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों को सहज बने रहने की जरूरत है तभी उनके प्रति विद्यार्थी आकर्षित रहेंगे। विद्यासागर कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन की प्राचार्या डॉ. सविता मिश्रा ने कहा कि जब अकादमी परिदृश्य में प्राप्त डिग्री रोजगार की दिशा में काम नहीं कर रही है तो इसका मतलब है कि हम शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन को बर्बाद कर रहे हैं। शिक्षक समाज को कक्षा में अभिनेता की तरह अध्यापन की भूमिका में बने रहने की जरूरत है तभी भाषा साहित्य का पारंपरिक अध्यापन रुचिकर बन पाएगा। सिलेबस के दबाव से मुक्त रहते हुए सीखने की प्रवृत्ति के लिए जरूरी संसाधनों को उपलब्ध कराने की जरूरत महसूस हो अकादमी परिदृश्य में।
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ रहीम मियां ने कहा कि साहित्य प्रेमियों को साहित्य के विषय में जानने के लिए इन्होंने 'हिंदी साहित्य संगम' एवं 'लिटरेचर लवर' नामक यूट्यूब चैनल को फॉलो करने की सलाह दी। इसके अलावा उन्होंने कौशल संवर्धन के लिए विभिन्न डिजिटल टूल्स जैसे 'duo lingo','memorize', 'लर्न हिंदी क्विकली' को डाउनलोड करने का सुझाव दिया। डॉ विनय कुमार पटेल ने कहा कि भाषा कौशल संवर्धन के महत्व को बताते हुए संप्रेषण के लिए भाषा पर पकड़ को महत्वपूर्ण बताया। हिंदी के अध्यापकों में सबसे बड़ी समस्या को बेबाक तरीके से सामने रखते हुए कहा "हिंदी भाषा के अध्यापक सीखना एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ना नहीं चाहते वे केवल कविता, कहानी और उपन्यास पढ़ाकर अपना काम निकाल लेना चाहते हैं"। अकादमी के सदस्य डॉ० ओमप्रकाश पांडे ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा रहा कि कौशल संवर्धन के लिए शिक्षक और विद्यार्थी दोनों को प्रयास करने होंगे। इस प्रयास में सबसे पहले बच्चों के भीतर का डर खत्म करना होगा और फिर उन्हें प्रोत्साहित करना होगा।
अध्यापिका पूनम सिंह एवं छात्रा राजनंदनी राय द्वारा कुशलतापूर्वक संचालित सत्रों में आशा साहू के राजस्थानी नृत्य ने माहौल को आनंदमय बना दिया। इस अवसर पर सिलीगुड़ी कॉलेज के इक्वेक कोऑर्डिनेटर डॉ झिनुक दासगुप्ता, शिक्षक परिषद के संपादक डॉ दर्शन चंद्र वर्मन, अमल राय, डॉ. रत्ना मिश्रा, डॉ. विजय शर्मा, डॉ. मीरा प्रसाद, अनिल कुमार गुप्ता, देवाशीष राय, मनीषा गुप्ता, ज्योति भट्ट, रश्मि भट्ट, ज्योति श्रीवास्तव, निशु साहू, शिवम प्रसाद, दीपक पासवान, अमित महतो, गौरव रस्तोगी, रोहित फास्फोर अस्मिता सुनार निखिल साहनी ने अपनी उपस्थिति के साथ सत्र में उठाए गए मुद्दों को जीवंतता प्रदान की। वहीं इस अवसर पर महकमा सूचना एवं संस्कृति अधिकारी जयंत कुमार मल्लिक भी उपस्थित रहे।