सिंडिकेट के आगे CUSTOM,CGST,DGGI ,SGST फेल UPGST ने कसी नकेल?

HIGHLIGHTS

UPGST की वाराणसी जिले की चंदौली की टीम ने सुपारी की दो गाडि़यों को जांच के लिए रोका

भूटान से बी-2-बी के फेक बिल पर सुपारी तस्‍करी जारी, एसएसबी का आंखों में झोंक रहे धूल

एनई न्‍यूज भारत, सिलीगुडी

पश्चिम बंगाल में फेक बिल के माध्यम से सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (सीजीएसटी) व स्टेट गुड सर्विसेज टैक्स (एसजीएसटी) के कई  हजार करोड़ का टैक्स चोरी का गोरखधंधा परवान चढ़ रहा है। परंतु इस गोरखधंधे पर एसजीएसटी सिलीगुड़ी रेंज, सीजीएसटी सिलीगुड़ी व कष्‍टम विभाग नकेल कसने में नाकाम है। वहीं दूसरी ओर यूपीजीएसटी ने फि‍र एक बार नकेल कसते हुए चंदौली की टीम दो ट्रक सुपारी रविवार की देर रात जांच के लिए रोका है। जिसमें एसजीएसटी चंदौली की टीम RJ39GA-7822 और RJ39GE-7149 को जांच के लिए रोका गया है।  इतना ही नहीं हाल में ही मेरठ की डीजीजीआई की टीम ने मेरठ, दिल्‍ली समेत पूर्वोत्‍तर के राज्‍यों में फैले सुपारी के सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया था। जिसमें करीब 5000 करोड़ के सुपारी सिंडिंकेट के साथ 250 करोड़ के आईटीसी रिफंड का मामला सामने आया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यूपी में DGGI व SGST इतने बड़े पैमाने पर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया तो बंगाल के CUSTOM,CGST,DGGI व SGST क्‍या कर रहा है, जबकि सुपारी का मुख्‍य कॉरिडोर सिलीगुड़ी ही है ?

भूटान बना सुपारी तस्‍करी का कॉरिडोर

पूर्वोत्‍तर के राज्‍य के अंर्तराष्‍ट्रीय सीमाओं पर नकेल कसने के बाद अब भूटानी सीमा क्षेत्र में विदेशी सुपारी तस्‍करी का कारोबार परवान चढ़ रहा है। उत्‍तर बंगाल के सिंडिकेट और सुपारी तस्‍कर एसएसबी का आंख में धूल झोंक कर बी-2-बी (भूटान से भूटानभूभ  () फर्जी बिल बनाकर भारत में सुपारी की तस्‍करी की जा रही है। तस्‍कर भूटान की एक अंर्तराष्‍ट्रीय सीमा से दूसरी अंर्तराष्‍ट्रीय सीमा से प्रवेश करने का बिल बनाकर तस्‍करी को अंजाम दे रहे हैं। उदाहरण के तौर पर में जयगांव की सीमा से निकलकर भूटान के ग्‍लेफू सीमा के रास्‍ते जाने वाले ट्रक को धूपगुड़ी और फालाकाटा में अनलोड किया जाता है। इस प्रकार एक दूसरे सीमा में प्रवेश को लेकर सुपारी तस्‍करी जोरों पर चल रही है।  

एसएसबी ने जब्‍त किया एक ट्रक सुपारी

SSB ने BOP खोकला, 53rd Bn SSB (सिमलाबाड़ी/फालाकाटा) के जवानों को खास खुफिया जानकारी के आधार पर एक खास चेकिंग ऑपरेशन के दौरान एक बड़ी कामयाबी मिली थी। सुपारी से भरा एक ट्रक पासाखा चेक पोस्ट पर IBB से लगभग 10 मीटर दूर BP नंबर 73/3 के पास ज़ब्त किया गया, जब इसे नकली कागज़ात का इस्तेमाल करके भूटान से भारत में तस्करी करके लाया जा रहा था। जांच के बाद SSB  ने सुपारी 305 बैग प्रत्‍येक में 40 kg अर्थात 12,200 kg के साथ भूटन के  BP-2-A-8859 को जब्‍त किया गया। हालांकि SSB ने सुपारी तस्‍करी के आरोप में  26 वर्षीय छेरिंग लामा निवासी सैंपलिंग, ज़िला चुखा, भूटान  के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए कस्टम ऑफ़िस, जयगांव को सौंप दिया गया है। हालांकि SSB भारत-भूटान बॉर्डर की सुरक्षा और क्रॉस-बॉर्डर स्मगलिंग को रोकने के लिए पूरी तरह तैयार है। बावजूद इसके बी-2-बी का फायदा उठाया जा रहा है।

क्या है फेक बिल के सिंडिकेट का राज

सूत्रों बताते हैं पश्चिम बंगाल में फेक बिल पर खासकर सुपारी और पान मसाला (गुटखा) का कारोबार होता है और इसका सिंडिंकेट देश के करीब हर राज्य में है, जहां पर सुपारी और पान मसाला की खपत है। खासकर फेक बिल के सिंडीकेट का संचालन कोलकता से होता है और इसमें नीचे से लेकर उपर तक के लोग शामिल है और इसके साथ कुछ सफेदपोश लोगों के संरक्षण में चल रहा है यह काला कारोबार चलता है। बंगाल से होने वाले सुपारी के काले कारोबार को सफेद करने के लिए पश्चिम बंगाल में सिलीगुड़ी के सिंडिंकेट को गाडि़यों को पास कराने का जिम्‍मा होता है। जबकि कूचबिहार में बैठे सिंडिकेट के द्वारा फेक बिल उपलब्‍ध कराने को बड़ी सुरक्षा से अंजाम देता है। खासतौर देश के अन्य राज्यों में प्रतिदिन करीब 15 से 20 गाड़ियों में सुपारी बंगाल के फालाकाट, धूपगुड़ी और बंगाल व असम सीमा से सटे क्षेत्रों से लोड किया जाता है, जिसका फेक बिल कोलकता से मेल द्वारा कूचबिहार के सिंडिकेट पास भेजा जाता है, जो माल भेजने वाले का बिल असम की पार्टी से होता है, इसके बाद सुपारी सभी गाड़ियां बंगाल की सड़कों से होकर अन्य राज्यों के लिए चली जाती है। विभागीय सूत्रों की माने तो फेक बिल का सिंडिकेट जीएसटी पंजीकरण के बाद एक फर्म में एक माह में अधिकतम सुपारी की 150 गाड़ियों का बिल करता है, उसके बाद इस फर्म को बंद कर दिया जाता है। फेक बिल के इस गोरखधंधे केन्द्र की सीजीएसटी व राज्य की एसजीएसटी को प्रतिमाह हजारों करोड़ का चूना लग रहा है। वहीं सलेटैक्स और अब एसजीएसटी के 25 वर्ष के इतिहास को देखा जाय तो राज्य सरकार को कम से कम हजारों करोड़ का चूना लगा चुके हैं।

 

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