फर्जी आईटीसी रिटर्न लेने वाले को सीजीएसटी ने दबोचा

• जीएसटी चोरी मामले आरोपी को कोर्ट ने 7 दिन के रिमांड पर सौंपा

• जारी जांच में कस्टम के तीन अधिकारियों का नाम भी शामिल 

एनई न्यूज भारत,सिलीगुड़ी: केंद्रीय वस्तु एवं सेवा ने एक फर्जी तरीके से माल को निर्यात कर फर्जी बिल के आधार पर करोड़ों रुपए का जीएसटी रिटर्न लिया है। जांच के बाद जीएसटी विभाग ने उस पर कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट में पेश करने के बाद 7 दिन के रिमांड पर लेकर पूरे मामला का खुलासा सीजीएसटी करेंगे।

 मालूम है कि भारत से भूटान में निर्यात करने और उसके रिटर्न लेने का यह गोरखधंधा बरसों से चल रहा था जिसके मुख्य मास्टरमाइंड को सीजीएसटी ने गिरफ्तार किया है और उसे पर करोड़ों रुपए का फर्जी भुगतान लेने का आरोप लगा है।

 सिलीगुड़ी में एक निर्यातक को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपी व्यक्ति को भूटान को निर्यात किए जाने वाले सिगरेट, पान मसाला एवं अन्य वस्तुओं के निर्यात से संबंधित कागजात उपलब्ध करवाने का मास्टरमाइंड माना जाता है जो लंबे समय से सरकार को इन निर्यातों के अनुचित रिफंड दावों द्वारा करोड़ों रुपए का धोखा दे चुका है। रिकॉर्ड सबूत के आधार पर मजबूती से यह कहा जा सकता है कि आरोपी ने कागजी लेन-देन पर आई टी सी प्राप्त करने, रिफंड दावों, भूटान को इन वस्तुओं के निर्यात को दिखाने में जनता के पैसों की लूट की है।

केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर द्वारा इनकी इकाइयों में. काव्या एंटरप्राइजेज़ एवं मे. एस. के. एंटरप्राइजेज़ के विरुद्ध जांच की शुरुआत की गई। आरोपी व्यक्ति ने ऐसे वस्तुओं की खरीद दिखाई जो वास्तव में उसने खरीदी ही नहीं थी और इसे भूटान को निर्यातित दिखाकर धोखे से आई टी सी रिफंड प्राप्त की। आरोपी के आवासीय एवं कार्यालय परिसर की तलाशी ली गई जिसमें कई दोषपूर्ण कागजात जब्त किए गए। इन इकाइयों द्वारा धोखे से सरकारी खजाने को कितनी राशि का नुकसान पहुंचाया गया है इसका सही आंकलन उन लेन-देन संबंधी जब्त कागजातों की जांच के उपरांत किया जाएगा। आरोपी को दिनांक 28 नवंबर को सिलीगुड़ी के अपर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पेश किया गया।

कुछ अन्य निर्यातकों के खिलाफ भी जांच की जा रही है जो इसी तरह के मामलों में संदिग्ध हैं। आगे की जांच जारी है।

बताते चलें कि फर्जी जीएसटी रिटर्न के मामले में कस्टमविभाग की मिली भगत से करोड़ों रुपए का भारत सरकार को चुना लगाया जा चुका है हालांकि इस मामले की जांच चल रही है जिसमें कस्टम विभाग के तीन अधिकारी भी शामिल होने के सबूत मिल रहे हैं