सिलीगुड़ी जीएसटी में नये एसी के आने से पहले मचा हड़कंप

 खड़गपुर से सिलीगुड़ी आ रहे हैं एडिशनल कमिश्नर नीलाद्री कर और खड़गपुर जा रहे जेसी गाइन

एनई न्‍यूज भारत

सिलगुड़ीः चिकननेक के रोड से फेक बिल और इनवॉइस लगाकर जीएसटी चोरी करने वालों की अब मुसीबतें बढ़ने वाली हैं, क्योंकि बेहद सख्त एडिशनल कमिश्नर नीलाद्री कर का तबादला खड़गपुर से सिलीगुड़ी जोन में किया गया है। वहीं, दूसरी ओर एडिशनल कमिश्नर चिन्मय दे की जगह अमरजीत रॉय को सिलीगुड़ी का एडिशनल कमिश्नर बनाया गया है। हालांकि एडिशनल कमिश्नर नीलाद्री कर को लेकर चर्चा का बाजार है। हालांक‌ि सरकार ने एसजीएसटी में चोरी को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए अब केन्‍द्र सरकार के साथ राज्य सरकार ने भी कमर कस ली और जीएसटी चोरी करने वालों की नकेल कसनी शुरू कर दी है। दरअसल, लोग फर्जी वे बिल लगाकर बड़ी मात्रा में टैक्स चोरी करते थे। इसी फेक इनवॉइसिंग को रोकने के लिए को खड़गपुर से एडिशनल कमिश्नर नीलाद्री कर को सिलीगुड़ी भेजा गया है। सूत्रों की मानें तो खडगपुर डिव‌िजन में भी सिंडिकेट का राज था और राज्य सरकार को काफी कर का चूना लगता था, लेकिन नीलाद्री कर के जाने के बाद वहां के कर चोरों ने खुद को कर चोरी से अलग कर लिया। हालांकि सवाल यह है कि खासकर सिलीगुड़ी जोन जो पूर्वोत्तर को जोड़ता है और अधिकतर गाड़ियां सिंडिकेट के इशारे पर चलती हैं। इसी सिंडिकेट को लेकर कुछ दिन पहले भी केन्द्रीय राज्यमंत्री व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. सुकांत मजुमदार ने पत्रकार वार्ता में सरकार पर सवाल उठाया था। उसी को देखते हुए राज्य सरकार ने सिंडिकेट और कर चोरी करने वालों की नकेल कसने क लिए काफी तेजतर्रार अधिकारी नीलाद्री कर को यहां भेजा है। सूत्रों की मानें तो नीलाद्री कर के राज में कर चोरी करने वाले खुद से तौबा करते हैं। अब रही बात पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के सिंडिकेट पर कितना नकेल कस पाते हैं यह समय बतायेगा। हालांकि उनके आने की चर्चा को लेकर कुछ कर चोरी करने वालाें में खौफ नजर आ रहा है। सूत्रों की मानें तो सिलीगुड़ी के रास्ते रोजना सैकड़ाें गाड़ियां या तो फेकबिल पर या सिंडिकेट के इशारे पर चलती हैं। अब देखना है कि कालीपूजा के बाद पद ग्रहण करने वाले नीलाद्री कर का कितना असर कर चोरों पर पड़ता है। वहीं दूसरी ओर जलपाईगुड़ी से एडिशनल कमिश्नर गायन को खड़गपुर स्‍थानांतरित किया गया है। हालांकि वह जब सिलीगुड़ी जीएसटी में थे तो उनका भी खौफ कर चोरों और सिंडिकेट में था और जिसके कारण उनका स्‍थानांतरण छह माह के भीतर सिलीगुड़ी से जलपाईगुड़ी कर दिया गया था।