गोरखाओं से संबंधित विषयों के समाधान के लिए त्रिपक्षीय बैठक
एनई न्यूज़ भारत, सिलीगुड़ी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की अध्यक्षता में वार्ता के दूसरे दौर में एक बार फिर संघीय ढांचे का अनादर करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार बैठक में शामिल नहीं हुई। हालांकि पहाड़ और गोरखाओं के हितों के लिए मुझे इस बैठक में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उक्त बातें डार्लिंग के सांसद वह भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजू बिष्ट ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहीं।
उन्होंने बताया कि, डेढ़ घंटे से अधिक समय तक चली वार्ता बिना उनके ही जारी रही, जिसमें केंद्र सरकार और दार्जिलिंग पहाड़ियों, तराई और डुआर्स के प्रतिनिधि शामिल थे। बातचीत का केंद्रबिंदु हमारे क्षेत्र का इतिहास, लोगों द्वारा सामना किए जा रहे अभाव, भेदभाव, शोषण की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाएं थीं। हमने 11 छूटी हुई गोरखा उप-जनजातियों के मुद्दे को तेजी से आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। चर्चा भारत के संविधान के तहत विभिन्न प्रकार के समाधानों पर केंद्रित थी। हमने एकजुट रुख अपनाया है कि एकमात्र स्वीकार्य समाधान वह होगा जो हमारी आकांक्षाओं को पूरा करे और हमारी भूमि, लोगों और क्षेत्र को संवैधानिक संरक्षण प्रदान करे।
राजू बिष्ट ने बताया कि मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि केंद्र सरकार मौजूदा संघीय ढांचे का सम्मान करते हुए बातचीत के जरिए समाधान निकालने की इच्छुक और प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार संवैधानिक समाधान के जरिए लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगी। उन्होंने आगे कहा कि हमारे इनपुट के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ उचित परामर्श के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गोरखा प्रतिनिधिमंडल में जीएनएलएफ प्रमुख मान घीसिंग, जीजेएम प्रमुख बिमल गुरुंग, सीपीआरएम अध्यक्ष जेबी राय, गोरानिमो प्रमुख दावा पाखरिन, सुमुमो प्रमुख विकास राय, भाजपा जिला अध्यक्ष डॉ कल्याण दीवान, दार्जिलिंग विधायक नीरज जिम्बा, कालचीनी विधायक बिशाल लामा, जीएनएलएफ महासचिव और पूर्व विधायक एनबी छेत्री और जीजेएम सचिव रोशन गिरी शामिल थे। बैठक में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण, जनजातीय मामलों के मंत्रालय के संयुक्त सचिव रौमुआन पैते जी, तथा गृह मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी।