एमयूएन में वन नेशन वन इलेक्शन पर चर्चा जरूरी : विमल

आज के युवा भारतीयों का एक धरती, एक विश्व का सपना कर सकते हैं साकार : सुधीकुमार
आशाभरी नजरों से विश्व देख रहा भारत की ओर, बढ़ गई युवाओं की जिम्मेदारी

एनई न्यूज सिलीगुड़ी
 पूर्वोत्तर भारत
के प्रवेशद्वार में पहली बार लायंस क्लब ऑफ सिलीगुड़ी सम्राट के लियो क्लब के सहयोग से मयूर स्कूल सिलीगुड़ी में दो दिवसीय रंगारंग शुभारंभ स्कूल प्रांगण में मॉडल यूनाइटेड नेशंस (एमयूएन) 2025 प्रारंभ हुआ। इस एमयूएन का विषय था, वैश्विक चुनौतियों का समाधान कैसे करे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सशस्त्र सीमा बल के उत्तर बंगाल फ्रंटियर के महानिरीक्षक सुधीर कुमार  साथ डीआईजी ए के सिंह, समाजसेवी रविन्द्र जैन, लायंस क्लब सम्राट सिलीगुड़ी की अध्यक्ष सिद्धि अग्रवाल, कार्यक्रम के मुख्य सलाहकार यश अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, स्कूल के चेयरमैन विमल डालमिया तथा उत्तर बंगाल के विभिन्न स्कूलों से आए सैकड़ों छात्र छात्राएं उपस्थित है।

मुख्य अतिथि आईजी सुधीर कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि आज पूरी दुनियां भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रहा है। इसका प्रमुख कारण है विश्व में समस्या तो है समाधान नहीं ? समाधान अगर है तो भारत के पास क्योंिकि भारत युवाओं का देश है। वहीं देश वसुधैव कुटुंबकम” ने सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है। इसका ज्वलंत उदाहरण भारत ने कोविड- 19 में देख चुका है। एक बार फिर म्यांमार में आए भीषण भूकंप पीड़ितों के लिए भारत लगातार अपनी टीम  भेज रही है। यही कारण है कि भारत विश्व गुरु बनने की ओर आगे बढ़ रहे है। देश आत्मनिर्भर, मेड इन इंडिया को विश्व पटल पर स्थापित करने में सफल रहे है। देश के युवाओ के मजबूत कंधे पर बड़ी जिम्मेदारी है कि उसे कैसे आगे लेकर जाए। सुधीर कुमार ने कहा कि एमयूएन आपको एक ऐसा मंच दिया है जिसके तहत आपको बताना चाहते है कि यहां वसुधैव कुटुंबकम का मतलब शांति, अहिंसा, सौहार्द  और भाईचारा  ही नहीं है, बल्कि यदि इस मंत्र को प्रत्येक देश अपनी विदेश नीति या मूलभूत संविधान में उतारने या लागू करने की कोशिश करें तो दुनिया की तमाम वैश्विक समस्याओं का निवारण स्वतः हो जाएगा।

जिससे धरती के संसाधनों का उपयोग भी प्रत्येक व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से आवश्यकतानुसार तय होगा। इससे हम पर्यावरणीय (ईको साइड या जलवायु परिवर्तन), सामाजिक (आर्थिक और सामाजिक असमानता), धार्मिक (मतभेद) , एवं आर्थिक (क़र्ज़) समस्याओं को भी हल कर सकेंगे। इसलिए एक समृद्ध विश्व के लिए, विश्व के नीति निर्माताओं को चाहिए कि इस मंत्र को अपनी- अपनी विदेश नीतियों में स्थान दे। तभी भारतीयों का सपना “एक धरती, एक विश्व” का साकार हो सकेगा। प्रत्येक व्यक्ति  या देश  शांति चाहता है, इसकी बात करता है, लेकिन कोई ये नहीं बताता, कि विश्व में शांति को किस तरह कायम किया जा सकता है। इस मामले में भारत अपनी अग्रणी भूमिका निभा सकता है, क्योंकि हमारे बुजुर्गों या ग्रंथों ने ब्रह्माण्ड को सर्वोपरि मानकर एक  स्वस्थ जीवन जीने के नियम प्रकृति के अनुरूप निर्धारित किये हैं।

अल्फ्रेड नोबल से लेकर अलबर्ट आइंस्टीन ने भी इस बात का समर्थन किया था कि अगर पृथ्वी पर शांति स्थापित करना है तो लोगों को हथियारों का उपयोग बंद करना होगा। कारण प्रकृति में लय है, गति है लेकिन कोई समय नहीं है। यही कारण है कि 2022 में भौतिकी का नोबल पुरूस्कार जीतने वाले वैज्ञानिकों ने ये कहा है कि ब्रह्माण्ड वास्तव में वास्तविक नहीं है। ये धारणा गलत प्रतीत होती है, क्योंकि पंचमहाभूत जिनसे इस सृष्टि का निर्माण हुआ है, ये सभी पांचों तत्व जीवंत है। हमारे विदेशमंत्री ने स्पष्ट किया है कि वसुधैव कुटुंबकम”, आचार्य विष्णु शर्मा की ओर से रचित पंचतंत्र नामक ग्रन्थ से लिया गया है। स्पष्ट है कि इसका सीधा सम्बन्ध भारत से है, जैसा कि यह कहा भी गया है कि वसुधैव कुटुंबकम का मंत्र दुनिया को भारत द्वारा दिया गया है. लेकिन पिछले कुछ बर्षो में इसको एक बेहतर तरीके से वैश्विक पहचान मिली।

स्कूल के चेयरमैन विमल डालमिया ने अपने संबोधन में कहा कि दिवसीय मॉडल यूनाइटेड नेशंस (एमयूएन) समिट यूनाइटेड नेशंस की बैठक के रूप में प्रतीकात्मक किसी देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसका उद्देश्य स्टूडेंट्स को देश के शासन तंत्र की जानकारी देते हुए उनमें लीडरशिप का विकास करना है। यह कांसेप्ट स्टूडेंट्स में राजनीति के वास्तविक मुद्दों और उनके हल की समझ विकसित करता है। विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के रूप में वे अपनी स्किल को प्रस्तुत करेंगे। युवा जरूर चर्चा करे कि समस्याओं के समाधान और समुचित विकास के लिए वन नेशन वन इलेक्शन जरूरी है। लियो सिद्धि अग्रवाल ने बताया कि कैसे विश्व भर के प्रतिनिधि अपने संसद प्रतिनिधियों का स्वागत किया।