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मयूर स्कूल में ‘नशा मुक्त–विकसित भारत’ अभियान: युवाओं ने लिया स्वस्थ और व्यसन-मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प
एनई न्यूज भारत सिलीगुड़ी
स्थानीय मयूर स्कूल में ‘नशा मुक्त भारत–विकसित भारत’ राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में स्कूल के सैकड़ों विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्रबंधन समिति के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह पहल ब्रह्माकुमारीज़ संस्था द्वारा भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) के सहयोग से चलाई जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य मूल्य-आधारित शिक्षा, ध्यान और जन-जागरूकता के माध्यम से समाज को हर प्रकार के नशा व व्यसन से मुक्त बनाना है।
कार्यक्रम के मुख्य बिंदु एवं वक्तव्य
डिजिटल डिटॉक्स और तकनीक का जिम्मेदार उपयोग:
ब्रह्माकुमारी रिचा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए आधुनिक समय में मोबाइल फोन की लत और स्क्रीन टाइम के अत्यधिक उपयोग से होने वाले शारीरिक व मानसिक दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीक जीवन को आसान बनाने के लिए है, न कि उस पर निर्भर होने के लिए। उन्होंने छात्रों को तकनीक के साथ एक स्वस्थ, संतुलित और जिम्मेदार संबंध बनाने के व्यावहारिक उपाय बताए।
ध्यान और आत्म-चेतना से मानसिक सशक्तिकरण:
बी.के. कोमल ने विद्यार्थियों को ध्यान (Meditation), आत्म-चेतना और सकारात्मक सोच की शक्ति से अवगत कराया। उन्होंने समझाया कि दैनिक जीवन में ध्यान और एकाग्रता अपनाने से न केवल पढ़ाई में सुधार होता है, बल्कि मानसिक तनाव और नकारात्मक आदतों से भी बचाव होता है।
शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर जोर
सत्र के दौरान विद्यार्थियों को यह समझाया गया कि कैसे नशा और विभिन्न डिजिटल व्यसन एकाग्रता को प्रभावित करते हैं। छात्रों को सकारात्मक विचारों और अनुशासित जीवनशैली के जरिए अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाने के लिए प्रेरित किया गया।
नशा-मुक्त भारत की शपथ और आभार ज्ञापन
कार्यक्रम के समापन पर एक विशेष शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। इसमें सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने एक स्वर में किसी भी प्रकार के नशे व हानिकारक आदतों से दूर रहने तथा देश को 'नशा मुक्त और विकसित भारत' बनाने में अपना सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।
विद्यालय प्रबंधन ने ब्रह्माकुमारीज़ की टीम द्वारा चलाए जा रहे इस सामाजिक अभियान की सराहना की और इस ज्ञानवर्धक सत्र के लिए उनका आभार व्यक्त करते हुए टीम के सदस्यों को स्मृति-चिह्न (Memento) भेंट कर सम्मानित किया।



