HIGHLIGHTS
हरतालिका तीज व्रत कथा के बिना अखंड सौभाग्य का महापर्व हरतालिका तीज अधूरा माना जाता है। यह केवल एक कहानी नहीं, बल्कि उस अटूट प्रेम, दृढ़ संकल्प और कठोर तपस्या का जीवंत वृत्तांत है, जो देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए किया था। जब कोई महिला 24 घंटे से अधिक समय तक निर्जला और निराहार रहकर इस कठिन व्रत को करती है, तो इस कथा का श्रवण ही उसे आध्यात्मिक शक्ति और संबल प्रदान करता है।
24 निर्जल व्रत रखकर सुहागन महिलाएं व कन्यायें करती हैं भगवान शिव की पूजा-अर्चना
सुहागन महिलाएं सुहाग की रक्षा तथा कुआंरी कन्यायें मनचाहे वर की कामना के लिए रखती हैं व्रत
एनई न्यूज भारत फीचर डेस्क, सिलीगुड़ी
हरतालिका तीज का व्रत सुहागन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं दोनों ही रखती है। सुहागन महिलाएं अपनी सुहाग की रक्षा के लिए जबकि कुंवारी कन्याएं मनचाहे वर की कामना के लिए रखती हैं। हरतालिका तीज का व्रत की महिला पुराणों में भी बताई गई है। इस व्रत की महिला भगवान शिव ने खुद माता पार्वती से बताई थी। हरतालिका तीज का व्रत करने वाली महिलाओं को इस कथा का पाठ करना बेहद जरुरी है।
परिवार के मंगल कामना के लिए रखा गया व्रत मंगलवार को पूरे 24 घंटे निराजल रखा गया। सिलीगुड़ी के इंडिगो रेजीडेंसी में महिलाओं ने व्रत रखकर शिव-पार्वती की कथा सुनकर परिवार के मंगल कामन के साथ सुहाग की रक्षा के लिए उपवास रखा। वहीं दूसरी ओर कलवार समाज की महिलाओं ने हरतालिका तीज के पर्व को बड़े धूमधाम से मनाया गया।
महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर सुबह से ही भागवान शिव की आराधना में जुटी हुई। एक तरफ जहां कलवार समाज की महिलाओं ने एकत्र होकर हरतालिका तीज की कथा सुनकर भगवान शिव की पूजा अर्चना की। वहीं दूसरी ओर इंडिगो रेजीडेंसी में महिलाओं ने एकत्र होकर सोलह श्रृंगार कर भगवान शिव की आराधना कर मनचाहा वर के साथ सुहाग की रक्षा के लिए प्रार्थना किया।
मालूम हो कि हरतालिका तीज व्रत कथा के बिना अखंड सौभाग्य का महापर्व हरतालिका तीज अधूरा माना जाता है। यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची निष्ठा और समर्पण से असंभव को भी संभव किया जा सकता है। यह सिर्फ एक पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि हर व्रती महिला के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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