अमृत कथाओं की कमाई पर लगा ब्रेक

• श्रोताओं की कमी और भुगतान नहीं मिलने की उम्मीद पर वापस लौटे कथावाचक
• राम-नाम की माला में लोगों का टूटा विश्वास, सिर्फ 32 श्रोताओं देख भड़के
• पांच दिवसीय हनुमत पंचामृत कथा कथा को बीच में छोड़कर वापस लौटे कथावाचक

एनई न्यूज भारत, सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन कर यहां के व्यापारियों से वसूली का गोरखधंधा परवान चढ़ रहा था। परंतु हनुमत पंचामृत कथा 2 दिन में ही बंद हो जाने के कारण अब लगता है कि इस तरह के आयोजन करने वालेसंस्थाओंं पर एक बड़ा तमाचा सिलीगुड़ी की जनता ने मारा है। सिलीगुड़ी के एक सोशल मीडिया पोस्ट पर कहा गया कि, "एक नामी हनुमान कथा वाचक, जो माया मोह को त्यागने का उपदेश देते है, वो रुपए एडवांस नहीं मिलने पर कथा छोड़ के भाग गए"।  इस प्रकार बीच में आयोजन रद्द होने को लेकर अब भक्तों में भी एक संशय की भावना उत्पन्न हो गई है।

मालूम हो कि सिलीगुड़ी के अंतरराष्ट्रीय अग्रवाल मंच के बैनर चले 5 दिवसीय हनुमत पंचामृत16 अगस्त से 20 अगस्त 2025 तक एक होटल कथा का आयोजन किया गया था। जिसमें श्री रामकार्यक्रम, हनुमत महायज्ञ एवं ध्यान साधना, 17 अगस्त को श्री श्याम संकीर्तन,
18 अगस्त को गौ सेवा कथा, 19 अगस्त को श्री रानी सती दादी जी मंगल पाठ, 20 अगस्त को हनुमत पंचामृत कथा और 16 से 20 अगस्त तक प्रथम दिवस।

द्वितीय दिवस, सुंदरकांड जो प्रातः काल 11 से दोपहर 1 बजे तक संध्याकाल 4 से 7 बजे तक।  तृतीय दिवस लंका कांड,  चतुर्थ दिवस उत्तरकांड कि कथा  पं. विजयशंकर मेहता कै द्वारा किया जाना था। परंतु दूसरे दिन ही कथा में विराम लग गयाऔर पंडित विजय शंकर मेहता वापस चले गएजिसके कारण कथा बीच में ही अधूरी रह गई।

लग्जरी थी व्यवस्था

बताते चलें कि अंतरराष्ट्रीय अग्रवाल मंच के बैनर चले आयोजित हनुमत पांचमृत कथा का आयोजन पुरी तरह से लक्ष्मी लग्जरी व्यवस्था में आयोजित किया गया था। कथावाचक की टीम के लिए बाकायदा स्वीट रूम बुक हुआ था और श्रोताओं के लिए 11000 से लेकर 31000 रुपए तक के कूपन की व्यवस्था की गई थी। सूत्रों की माने तोइस कथा को बीच में छोड़कर जाने का प्रमुख कारण कथा वाचक के भुगतान का होना नहीं माना जा रहा है।

भक्तों की कमी से रद्द हुई कथा: हरेंद्र लोहिया

अंतरराष्ट्रीयय अग्रवाल मां के अध्यक्ष हरेंद्र लोहिया ने बताया किआयोजन एक अलग तरह से किया जाने की योजना थी। इसके साथ ही सारे भक्तों को वीआईपी ट्रीटमेंट देने की व्यवस्था के उद्देश्य से इस कार्यक्रम को होटल में किया गया था। परंतु अफसोस की पहले दिन सिर्फ 32 श्रोताओं के उपस्थित होने से कथावाचक का मन टूट गया और उन्होंने खुद हि मानाकर दिया। हालांकि हरेंद्र लोहिया ने कुछ पुराने संस्थाओंं पर आपोप लगाते हुए कहा कि इस कार्यक्रम को असफल करने में उन लोगों का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय अग्रवाल मंच इस कथा को लेकरखासकर महिलाओं में अपनी पेट नहीं बनापाया जिसके कारण श्रोताओं की कमी हो गईऔर कथावाचक में खुद ही कथा करने से मानाकर दिया।

तामझाम और विज्ञापनों से हुआ था प्रचार

हनुमत पंचामृत राम कथा के आयोजन को लेकरआयुर्वेद कौन है भारी भरकम प्रचार प्रसार किया था जिसमें सोशल मीडिया पर विज्ञापन के अलावा अखबारों में फूल पेज विज्ञापन जारी किए थे, लेकिन पूरा मामला शिफर होते हुए सब टांय-टांय  फुस्स हो गया।
बताते चलें कि सिलीगुड़ी में राम कथा, भागवत कथा, हनुमत कथा जैसे आयोजन पर करोड़ों रुपया खर्च किया जाता है और इसी वसूली धर्म के नाम पर स्थानीय व्यापारियों के साथ उत्तर बंगाल के व्यापारियों से भी किया जाता है। राम नाम की माला पर गोरख धंधा करने वालों के लिए हनुमत पंचामृत कथा का बीच में बंद हो जाना इस प्रकार के गोरख धंधा करने वालों के मुंह पर एक तमाचा लगा है।