HIGHLIGHTS
मुनिश्री आनंद कुमार जी "कालू" के सानिध्य में तपस्वी अमृत सेठिया, का मासखमण का तप अभिनंदन का कार्यक्रम संपन्न
मुनिश्री आनंद कुमार "कालू" ने कहा, भूखा रहना तपस्या नहीं, अपने मन और काया को जो वश में कर लिया, वही है तपस्या
एनई न्यूज भारत, सिलीगुड़ी
जैन स्वेतांबर तेरापंथ के 11वें आचार्यश्री महाश्रमणजी के विद्वंन् सुशिष्य मुनिश्री आनंद कुमार "कालू" एवं सहवर्ती मुनीश्री विकास कुमार के सानिध्य में स्थानीय तेरापंथ सभा भवन में तपस्वी अमृत सेठिया, का मासखमण का तप अभिनंदन का कार्यक्रम सानंद संपन्न हुआ। यह मास्खमण का तप मुनीश्री के मंगल प्रेरणा पाकर उपवास तप से शुरू किया गया। अपने मनोबल तथा दूव निश्चय का परिचय देते हुए यह मासखनण का तप अमृत सेठिया, के द्वारा किया गया। मासखमण की तपस्या यानि29 तक निराहार रहकर तथा जैन अनुयायी सूर्यास्त से सूर्योदय तक जल को भी ग्रहण नहीं करते हैं।
तपस्या में त्याग की परंपरा का हुआ निर्वहन
तपस्वी अमृत सेठिया, पुत्र बजरंग लाल सेठिया एवं माता श्रीमती चंद्रकला सेठिया, कार्यक्रम के मद्देनजर शुक्रवार को तपस्वी भाई अमृत सेठिया, को सुबह आठ बजे उनके निवास स्थान से रथ में बिठाकर गाजे बाजे के साथ जुलूसबद्ध होकर नगर भ्रमण करते हुए तेरापंथ भवन में लाया गया। जहां मुनिश्री आनंद कुमार "कालू" ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि भूखा रहना तपस्या नहीं होती अपने मन, वचन, काया को वश में करके जब शरीर को कुश किया जाता है तब यह तपस्या कहलाता है। मुनिश्री ने कहा कि मन को स्थिर रखना कोई आसान काम नहीं है ।
जहां हमें हर दो-तीन घंटे के बाद फिर भूख लग जाती है वहां मांसखमण जैसा दुष्कर तप करने वाले तपसियों को धन्य है बजरंग लाल सेठिया, श्रीमती चंद्रकला सेठिया के पुत्र। तेरापंथ भवन में कार्यक्रम की शुरुआत मुनिश्री के महामंत्रोच्चार के साथ की गई तत्पश्चात तेरापंथ महिला मंडल की बहनों द्वारा सामूहिक तप अनुमोदना गीतिका का संगान किया, तेरापंथ सभा के उपाध्यक्ष रंजीत जी बोथरा ,ने साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभाजी, सभा मंत्री महेंद्र गोलछा, ने मुनिश्री प्रशान्तकुमार चातुर्मास व्यवस्था समिति के संयोजक मदन संचेती ,ने मुनिश्री ज्ञानेंद्र कुमार, व मुनिश्री रमेश कुमार, के संदेश का वाचन किया मुनिश्री विकास कुमार ने "तपअमृत का प्याला" की तप अनुमोदना की भावपूर्ण गीतिका की प्रस्तुति दी तेरापंथ सभा अध्यक्ष किशन लाल की आंचलिया, जैन विश्व भारती के कार्यकारिणी सदस्य मनीष सिंघी, साहित्य प्रभारी दिलीप दूगड़ , उत्तर बंगाल के आंचलिक प्रभारी सुरेंद्र छाजेड, ने तपस्वी भाई अमृत सेठिया, तप की अनुमोदना करते हुए सकल- समाज को अपनी संस्कृति एवं सभ्यता को जीवंत रखने की बात बतलाई।
परिवार की ओर से उनके पिता बजरंग लाल सेठिया ,सेठिया परिवार की ओर से गीतिका, मधु जैन , रेखा सेठिया , उपाशिका सासू मां श्रीमती संगीता पटावरी , तप की अनुमोदना की तपस्वी भाई अमृत सेठिया की पुत्री तान्या ,वाणी, के द्वारा सुंदर वह रोचक प्रस्तुति दी गई। जिसमें दिखाया गया कि स्वर्गलोक से देवी-देवता और गुरु भी तपस्वी को दर्शन देने एवं तपस्या में साथ देने के लिए आते हैं। इस मौके पर तपस्वी भाई को श्री जैनश्वेतांबर तेरापंथथी सभा, तेरापंथ महिला मंडल तेरापंथ युवक परिषद, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम,अणुव्रत समिति , श्रीजैन श्वेतांबर तेरापंथ ट्रस्ट के द्वारा प्रशस्ति पत्र और अष्ट मंगल देकर सम्मानित किया गया। समाजसेवी धनराज भंसाली ,ने भी तपस्वी भाई का सम्मान किया समारोह का कूशल व सफल संचालन मुनिश्री आनंद कुमार "कालू" ने किया ।



