बर्फानी बाबा की यात्रा से काश्मीर की अर्थ व्‍यवस्‍था को 750 करोड़ को बूस्टर डोज

HIGHLIGHTS

अमरनाथ यात्रा का महत्व आदि देव, महादेव, स्वयंभू, पशुपति, नीलकंठ, भगवान आशुतोष, शंकर, भोले भंडारी को सहस्त्रों नामों से स्तुति कर पुकारा जाता है। श्री अमरनाथ को भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक तीर्थों का तीर्थ कहा जाताहै। कश्मीर में वैसे तो 45 शिव धाम, 60 विष्णु धाम, 3 ब्रह्मा धाम, 22 शक्ति धाम, 700 नाग धाम तथा असंख्य तीर्थ हैं पर श्री अमरनाथ धाम का सबसे अधिक महत्व है। काशी में लिंग दर्शन एवं पूजन से दस गुणा, प्रयाग से सौ गुणा, नैमिषारण्य तथा कुरुक्षेत्र से हजार गुणा फल देने वाला श्री अमरनाथ स्वामी का पूजन है। देवताओं की हजार वर्ष तक स्वर्ण पुष्प मोती एवं पट्टआ वस्त्रों से पूजा का जो फल मिलता है, वह श्री अमरनाथ की रसलिंग पूजा से एक ही दिन में प्राप्त हो जाता है। जिसने कभी अमरनाथ की रोमांचक यात्रा नहीं की, वह बहुत दुर्भाग्यशाली इंसान है, क्योंकि वह धरती के स्वर्ग के एक ख़ास आनंद से वंचित रह गया है। दरअसल, केदारनाथ से आगे है अमरनाथ और उससे आगे है कैलाश पर्वत। कैलाश पर्वत शिवजी का मुख्या समाधिस्थ होने का स्थान है तो केदारनाथ विश्राम भवन। हिमालय का कण-कण शिव-शंकर का स्थान है।

3 जुलाई से शुरु हुई यात्रा के शुरुआती 3 दिन में करीब 48 हजार श्रद्धालु कर चुके हैं पवित्र गुफा के दर्शन

पहलगाव अटैक के बाद फि‍र पटरी पर लौट रही जम्मू काश्मीर की अर्थ व्यवस्था, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

एनई न्यूज भारत, सिलीगुड़ी

शक्ति-भक्ति, उत्सव और उत्साह की प्रतीक श्री अमरनाथ यात्रा से और मनमोहक वादियों से जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को लगभग 750 करोड़ का बूस्टर डोज मिलने वाला है। पहलगाम की वादियों में हुई कायराना आतंकी हमले के बाद पटरी से उतरे कश्मीर के पर्यटन के लिए यह यात्रा वरदान साबित हो रही है। 3 जुलाई से यात्रा के शुरुआती 3 दिन में ही करीब 48 हजार श्रद्धालु पवित्र गुफा के दर्शन कर चुके हैं और यात्रियों के उत्साह को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि 38 दिन चलने वाली यात्रा में लगभग साढ़े सात लाख शिवभक्त दर्शन करने आ सकते हैं। इस यात्रा से सबसे अधिक घोड़े-पालकी, टेंट वाले, छोटे दुकानदार और टैक्सी वाले लाभ हो रहे हैं। यानी पैसा सीधा आम आदमी की जेब में जाएगा। यही वर्ग पहलगाम आतंकी हमले के बाद पर्यटकों के न आने से सबसे अधिक प्रभावित भी हुआ है। अप्रैल के महीने में हुए पहलगाम के वैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद लोगों में श्री अमरनाथ यात्रा को लेकर थोड़ा डर भी है, लेकिन प्रशासन की तरफ से सुरक्षित यात्रा के कड़े इंतजाम किये जाने से यात्रा में उत्साह देखा गया।

श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान खासकर जम्मू-कश्मीर की घाटी में होटल, ट्रांसपोर्ट, दुकानदार, व्यापारी और पर्यटन स्थलों पर काम करने वाले छोटे-छोटे दुकानदार श्री अमरनाथ यात्रा से ही आस लगाए बैठे थे। जम्मू में आधार शिविर यात्री निवास हो या बालटाल व पहलगाम में आधार शिविरों के आसपास गर्म कपड़े, बरसाती, छाते, बैग समेत यात्रा में काम आने वाली वस्तुएं बेचले वाले छोटे दुकानदार श्री अमरनाथ की सुरक्षित यात्रा से सभी खुश हैं।

बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु जम्मू-कश्मीर के प्रवेश द्वार लखनपुर से आगे कठुआ, सांबा, जम्मू, ऊधमपुर, रामबन से होते हुए श्रीनगर, अनंतनाग, गांदरबल जिला से होकर गुजरते हैं। इससे स्थानीय व्यापार को लाभ मिल रहा है इसके साथ ही जम्मू में बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पंजीकरण तिथि से पहले आ गए यात्री या पंजीकरण कराने के इंतजार में रुके श्रद्धालु खाली समय में जम्मू में रघुनाथ मंदिर, श्री माता वैष्णो देवी व अन्य धार्मिक पर्यटन स्थलों का भी रुख कर रहे हैं। वहीं श्रद्धालु अपनी जरूरत के अनुसार छोटी-मोटी खरीदारी भी कर रहे हैं। कई यात्रा के बाद कश्मीर की वादियों का लुफ्त उठाने के लिए घूम रहे हैं। जबकि जम्मू काश्मीर की अर्थ व्यवस्था को बूम देने के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी देशभर से श्रद्धालुओं को यात्रा पर आने की अपील कर रहे हैं और इसका असर भी यात्रा में दिख रहा है।

80 हजार तक कमाते पिठ्ठू वाले

बालटाल रूट में यात्रा के दौरान पिट्ठू का काम करने वालों का कहना है कि हमें बाबा बर्फानी की यात्रा का इंतजार रहता है। हम खेती-बाड़ी करते हैं और परिवार का भरण पोषण करे हैं, लेकिन श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान करीब 70-80 हजार रुपये कमा लेते हैं। इससे हमारे चार-पांच महीने के खर्च निकल जाते हैं। इसके साथ ही परिवार के लोग बालटाल व पहलगाम में दुकानें लगाकर रोजगार कर रहे हैं।

अर्थव्यवस्था की गणित

किसी भी यात्रा में अगर चार लाख श्रद्धालु आते हैं तो औसतन एक यात्री कम से कम 10 हजार रुपये खर्च करता है। इसमें जम्मू से कश्मीर तक बस या टैंपों का किराया भी शामिल हैं। इसके साथ ही यात्रा मार्ग पर टेंट में रहना, घोड़ा, पिट्ठू या पालकी की सेवा लेना शामिल है। इसके साथ ही श्रद्धालु बरसाती, जैकेट, गर्म टोपी, मौजे, खाने-पाने का सामान, प्रसाद आदि खरीदते हैं। कुछ श्रद्धालु यात्रा से पहले या बाद में जम्मू व कश्मीर में घूमते हैं। इससे आने वाला पैसा अर्थव्यवस्था मजबूत करता है। श्री अमरनाथ यात्रा से हमारे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बल मिलता है। इसका लाभ स्थानीय दुकानदारों, पर्यटन से संबंधित लोगों, घोड़े-पिट्ठू वालों को होता है। इस बार भी हमें उम्मीद है कि यात्रा यहां की अर्थव्यवस्था के लिए शुभ होगी।