HIGHLIGHTS
नवोदित कवयित्री गुंजन गुप्ता के प्रथम काव्य संग्रह 'संवेदना की पुकार 'का लोकार्पण
मां को याद करते हुए हुई भावुक आंखें हुईं नम, काश! इस पल की साक्षी होतीं मेरी मां
एनई न्यूज भारत, सिलीगुड़ी
सिलीगुड़ी के गुरूंग नगर स्थित लिट्ल माडलाटाइ्स स्कूल में कालजयी मंच के तत्वावधान में नवोदित कवयित्री गुंजन गुप्ता के प्रथम काव्य संग्रह 'संवेदना की पुकार 'का लोकार्पण हुआ। अतिथियों को उत्तरीय और पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। बसंत कारवां ने सुमधुर आवाज में सरस्वती वंदना कर मां शारदे को नमन किया तो वहीं दीपिका जायसवाल ने संस्था (कालजयी मंच) का गीत गाकर सुंदर माहौल बना दिया। कालजयी मंच के महासचिव व वरिष्ठ साहित्यकार देवेन्द्र नाथ शुक्ल ने स्वागत भाषण दिया। पुस्तक का लोकार्पण एवं विमोचन विशिष्ट अतिथियों के कर-कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर कालजयी मंच की ओर से कवयित्री गुंजन गुप्ता को मोमेंटो, शॉल और पुष्प गुच्छ प्रदान किया गया। यह सम्मान कवयित्री के उत्साहवर्धन हेतु था। नयी प्रतिभा को मंच प्रदान करना कालजयी मंच का उद्देश्य है। इस अवसर पर वक्ता के रूप में नक्सलबाड़ी कालेज की प्रिंसिपल डॉ सविता मिश्रा, डॉ राजेन्द्र प्रसाद सिंह, सिलीगुड़ी महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ अजय कुमार साव, कालजयी मंच के अध्यक्ष व वरिष्ठ साहित्यकार डॉ भीखी प्रसाद 'वीरेंद्र' ननी भट्टाचार्य स्मारक महाविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सरोज शर्मा उपस्थित थे।
आलेख पाठ वरिष्ठ साहित्यकार डॉ ओमप्रकाश पाण्डेय ने किया। डॉ वंदना गुप्ता, बबीता अग्रवाल 'कंवल', अर्चना शर्मा, डॉ कल्पना सिंह, राजेश गुप्ता, प्रियंका जायसवाल ने शुभकामनाएं प्रेषित की। इस अवसर पर महिला काव्य मंच की ओर से पुष्प गुच्छ भेंट कर गुंजन गुप्ता को सम्मानित भी किया गया। इस बीच शहर के शायर नेमतुल्लाह नूरी, अशोक अग्रवाल, सुधीर कुमार श्रीवास्तव,डॉ श्याम सुंदर अग्रवाल,साहु वैश्य तैलिक समाज के अध्यक्ष पवन कुमार गुप्ता, सचिव धनंजय गुप्ता और अन्य गणमान्य व्यक्तियों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों की भी अच्छी उपस्थिति रही।
गुंजन गुप्ता ने अपने वक्तव्य में कहा कि इस पल का उन्हें वर्षों से इंतजार था। इस सफर को तय करना एक सपने जैसा था जिसमें उनका कठिन परिश्रम और लगन के साथ माता-पिता ,परिवार के साथ गुरुजनों का भी भरपूर सहयोग मिला। उन्होंने सभी का आभार प्रकट किया। अपनी मां को याद करते हुए वो भावुक भी हुईं। काश! इस पल की साक्षी मां होतीं। यह सबसे भावपूर्ण और स्मरणीय क्षण था। समारोह में आये हुए सभी लोगों की आंखें नम थीं। वह बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही कविताएं लिखने का शौक था। वह कक्षा चार से ही लिखना प्रारम्भ कर चुकी थीं।
ऐसी उम्मीद है कि साहित्य जगत में गुंजन गुप्ता का काव्य संग्रह 'संवेदना की पुकार' अपनी एक खास जगह बनायेंगी।
डॉ भीखी प्रसाद 'वीरेंद्र' की अध्यक्षता और डॉ मुन्नालाल प्रसाद के संचालन में कार्यक्रम बहुत शानदार रहा। इस अवसर पर जयगांव से उनके पिता रमाशंकर गुप्ता और आगरा से उनके जीवन साथी मनीष कुलश्रेष्ठ ने भी उपस्थित रहकर उनका उत्साहवर्धन किया। अंत में देवेन्द्रनाथ शुक्ल ने धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।



