प्रबुद्ध वर्ग चौपाल में लोकधुनों की मिठास से हुआ सराबोर

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प्रबुद्ध वर्ग चौपाल में गीत-गवनई के साथ लगा ठुमका, वरिष्ठ नागरिकों ने बिखेरी उमंग

एनई न्‍यूज भारत, गोरखपुर

गोरखपुर के रेलवे डेयरी कॉलोनी में प्रत्येक माह आयोजित होने वाली वरिष्ठ नागरिकों की प्रबुद्ध वर्ग चौपाल का आयोजन आज एक्सीलेंस एकेडमी के तत्वावधान में तथा सुभाष दुबे के संयोजन में उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ कवि सुधीर श्रीवास्तव ने अपनी कविताओं के पाठ से किया। इसके बाद आचार्य मुकेश ने अपनी प्रतिनिधि रचना “औरतनामा” सुनाई, जिसे श्रोताओं ने मुक्तकंठ से सराहा। वरिष्ठ नागरिक डॉ. धर्मदेव सिंह और कवि सुभाष यादव ने अपनी भोजपुरी रचनाओं से कार्यक्रम को ऊँचाई प्रदान की।

भोजपुरी लोकगायक डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने चैत माह की सुगंध बिखेरते हुए अपना लोकप्रिय गीत “चईते चान चिढ़ावे हो रामा, चमकी-चमकी के…” प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित श्रोताओं को लोकधुनों की मिठास से सराबोर कर दिया। कुशीनगर से आए वरिष्ठ साहित्यकार सुधाकर तिवारी ने भोजपुरी लोक संस्कृति की समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ रचनाकार रामाराव ने “केहू रहे चाहे जाय, दुनिया चलते रही…” प्रस्तुत कर जीवन के यथार्थ को रेखांकित किया, जबकि वरिष्ठ कवि प्रेमनाथ मिश्र की रचनाओं ने खूब तालियाँ बटोरीं। दिनेश गोरखपुरी ने अपनी रचना “कर्मफल चालीसा” की चौपाइयाँ सुनाईं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कमलाकांत श्रीवास्तव ने प्रबुद्ध वर्ग चौपाल के उद्देश्य पर प्रकाश डाला तथा प्रो. अवधेश तिवारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के प्रायोजक पूर्व रेलवे भर्ती बोर्ड अध्यक्ष बक़रीदन ने सभी आगंतुकों का स्वागत करते हुए इसी माह जन्मे डॉ. धर्मदेव सिंह, सुधीर श्रीवास्तव एवं संजय वर्मा को स्मृति-चिह्न व माल्यार्पण कर जन्मदिन की शुभकामनाएँ देते हुए सम्मानित किया।

इस अवसर पर संजय पांडेय, राकेश उपाध्याय, अजय यादव सहित अनेक प्रतिभागियों ने भी अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। कार्यक्रम में डॉ. सुरेश, त्रिभुवन मणि त्रिपाठी, रविन्द्र मोहन तिवारी, काशी नरेश चौबे, राकेश गुप्ता, पूर्व रजिस्ट्रार अरुण श्रीवास्तव, अष्टभुजा पांडेय, परमात्मा सिंह, राकेश सक्सेना, हरीश चंद्र, मुरलीधर, गिरजानंद सिंह, ओम प्रकाश श्रीवास्तव, जनार्दन, चन्द्रमोहन त्रिपाठी सहित सैकड़ों वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन शिवेन्द्र पांडेय ने किया तथा आभार ज्ञापन विनोद पांडेय ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण उस समय देखने को मिला जब सभी वरिष्ठ नागरिकों ने एक साथ “ज़िंदगी प्यार का गीत है…” की धुन पर झूमते हुए यह संदेश दिया कि उमंग, उत्साह और मस्ती के लिए उम्र कभी बाधक नहीं होती।