HIGHLIGHTS
राष्ट्रीय संगोष्ठी का द्वितीय सत्रभारत के स्वतंत्रता आंदोलन की गूंज
इतिहास लेखन में वैकल्पिक व परंपरागत स्रोत भी होता है महत्वपूर्ण
एनई न्यूज भारत, गोरखपुर (यूपी)
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग एवं उत्तर प्रदेश राज्य अभिलेखागार, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में "भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की गूंज" विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का द्वितीय सत्र प्रोफेसर एस. एन. चौबे, अध्यक्ष, इतिहास विभाग, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की अध्यक्षता में प्रारंभ हुआ।
इस सत्र में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय एवं दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने विभिन्न विषयों पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर एस. एन. चौबे ने इतिहास लेखन में चौरी-चौरा के प्रसंग को रेखांकित करते हुए व्यापक सांस्कृतिक इतिहास लेखन पर बल दिया।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र एवं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर ईस्ट एशियन स्टडीज के प्रोफेसर हृदय नारायण ने इस संयुक्त आयोजन की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भविष्य में भी ऐसी संगोष्ठियों का आयोजन जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय एवं दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में किया जाएगा।
अगले वक्ता प्रोफेसर राजेश नायक, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि इतिहास लेखन में केवल आधिकारिक तथ्यों पर ही नहीं, बल्कि वैकल्पिक स्रोतों पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने मौखिक इतिहास एवं परंपरागत स्रोतों को इतिहास लेखन में समाहित करने तथा साहित्य के साथ इतिहास को जोड़कर उसे और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया।
इस सत्र का संचालन इतिहास विभाग की सहायक आचार्य डॉक्टर सुनीता और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. श्वेता के द्वारा किया गया।



