यूपी में फर्जी फेक बिल पर आईटीसी रिफंड का भड़ाफोड़

HIGHLIGHTS

तबस्सुम और प्रशांत गरीब लोगों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके निजी दस्तावेज करते थे हासिल: कमलेश दीक्षित

पूर्व कैशियर और शिक्षित युवकों ने मिलकर कर चोरी के अपराध का ढांचा किया था तैयार, बनायी 15 से अधिक फर्जी फर्म

1 प्रतिशत कमीशन पर चल रहा था फर्जी आईटीसी रिफंड का गोरखधंध, मिले 136 से अधिक फर्जी बिल

विशाल मेगा मार्ट में 8 हजार की नौकरी करने वाला प्रशांत, लाखों के लालच में काले कारोबार में हुआ शामिल

बंगाल में भी सिंडिकेट और फेक बिल पर आईटीसी का काला कारोबार चढ़ रहा परवान विभाग खामोश

एनई न्यूज भारत, लखनऊ

बंगाल की तर्ज पर अब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी जीएसटी कर चोरी के एक संगठित सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। जिसने फर्जी फर्मों का मकड़जाल बुनकर राज्‍य सरकार को पौने 2.45 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाया है। साइबर सेल और इंटौजा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार हुए इस गिरोह के सदस्यों तार बेहद शातिर तरीके से जुड़े थे।

इस गोरखधंधे में पूर्व कैशियर और शिक्षित युवकों ने मिलकर कर चोरी के अपराध का ढांचा तैयार किया था। यह गिरोह गरीब और जरूरतमंद मजदूरों को महज 10-20 हजार रुपये का लालच देकर उनके आधार, पैन और बैंक दस्तावेज हासिल करता था। फिर इन दस्तावेजों के आधार पर कागजों में 15 से अधिक बोगस फर्में खड़ी कर दी जाती थीं और उसी के आधार पर सिर्फ कागजों में लेन-देन कर आईटीसी का लाभ लिया जाता था। वहीं दूसरी ओर बंगाल में फेक बिल पर आईटीसी रिफंड और खासकर सुपारी का कारोबार परवान चढ़ रहा है।

फर्जी फर्मों पर आईटीसी के कमीशन का खेल

यह गिरोह बिना किसी असली बिजनेस के, इन फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों की बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) केवल 1 प्रतिशत कमीशन पर बेचा रहा था। पुलिस ने आरोपियों के पास से 136 से अधिक फर्जी बिल, भारी संख्या में सिम कार्ड और डेबिट कार्ड बरामद किए हैं। गिरोह के काम करने का तरीका बेहद शातिराना अंदाज था।

रुपयों का लालच देकर हासिल करते थे दस्तावेज

डीसीपी क्राईम कमलेश दीक्षित ने पत्रकारों को बताया कि आरोपी तबस्सुम और प्रशांत कानपुर के गरीब लोगों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके निजी दस्तावेज हासिल करते थे। इन्‍ही दस्तावेजों के आधार पर मास्टरमाइंड अम्मार अंसारी फर्जी किरायानामा तैयार कर 'स्वराज ट्रेडर्स' जैसी 15 से अधिक बोगस फर्में जीएसटी पोर्टल पर रजिस्टर कराता था।

अस्तित्वहीन व्‍यापार और फर्जी इनवॉइस

फर्में हकीकत में जमीनी अस्तित्व में नहीं थीं, लेकिन कागजों पर एल्युमिनियम, स्क्रैप और स्टील की बिक्री दिखाकर फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल जारी किए जाते थे। इसके बदले में गिरोह वास्तविक कंपनियों को 1% कमीशन पर बोगस ITC बेचकर अवैध कमाई करता था।

पहले भी जेल जा चुका है मास्टरमाइंड

मास्टरमाइंड अम्मार अंसारी फर्जी फर्मों के रजिस्ट्रेशन और ITC जनरेट करने का मुख्य काम देखता था, जो पहले भी सीतापुर से जेल जा चुका है। वहीं कानपुर के विशाल मेगा मार्ट में 8 हजार की मामूली नौकरी करने वाला प्रशांत, लाखों के लालच में तबस्सुम के साथ लखनऊ आकर इस काले कारोबार में शामिल हो गया।

गिरोह के सदस्य और उनकी भूमिका

प्रशांत का काम मुख्य रूप से फर्जी इनवॉइस जनरेट करना और बाजार में ITC बेचना था। तबस्सुम उर्फ जान्हवी ने अपने रिश्तेदार अम्मार और दोस्त प्रशांत के साथ मिलकर लोगों के दस्तावेज जुटाने का एक बड़ा नेटवर्क फैला रखा था। इसी नेटवर्क का शिकार कानपुर का मजदूर दौलत राम बना, जिसने मात्र 20 हजार के लालच में अपने सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज गिरोह को सौंप दिए थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों का एक बड़ा जखीरा बरामद किया है।

बरामदगी और पुलिस की जांच

पुलिस को छापेमारी के दौरान 20 से अधिक डेबिट कार्ड, 26 से ज्यादा सिम कार्ड और 11 मोबाइल फोन बरामद किया हैं। इसके अलावा 136 फर्जी बिल/इनवॉइस, एक लैपटॉप और कई कूटरचित किरायानामे भी जब्त किए गए हैं। डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि इस मामले का खुलासा तब हुआ जब सहायक आयुक्त राज्य कर अभिमन्यु पाठक ने स्वराज ट्रेडर्स द्वारा 52 लाख रुपये की संदिग्ध कर चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई। जांच के दौरान यह भी पता चला कि 'SS GALAXY' और 'SS ENTERPRISES' जैसी कंपनियों ने भी इस गिरोह के साथ मिलकर करीब 19 लाख रुपये की कर चोरी की है।

इस ममले को लेकर पुलिस ने इन कंपनियों के मालिक सुमित सौरभ को भी इस मामले में गिरफ्तार कर लिया है। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की साइबर/सर्विलांस टीम और थाना इंटौजा की इस संयुक्त कार्रवाई ने राजस्व को हो रहे बड़े नुकसान को रोक दिया है। यह गिरोह अब तक 15 से अधिक फर्जी जीएसटी फर्में बनाकर करीब पौने तीन करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी को अंजाम दे चुका है। फिलहाल पुलिस इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य संभावित नामों और कंपनियों की भी गहनता से जांच कर रही है।

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