पुलिस हिरासत से शुरू तारिक का सफर अब सत्‍ता के शिखर तक

HIGHLIGHTS

Bangladesh Election 2026: भारत के पड़ोसी देश बंगला देश में गुरुवार को हुए आम चुनाव में तारिक अब सिर्फ बांग्लादेश में लंबे समय तक शासन करने वाले परिवार के उत्तराधिकारी ही नहीं हैं। बल्कि  उन्होंने खुद को मौजूदा वक्त में यहां का सबसे शक्तिशाली नेता भी साबित कर दिया है।

•तारिक रहमान की पार्टी BNP ने बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव में प्रचंड बहुमत से जीत की हासिल

•तारिक रहमान 4 साल की उम्र में जेल जाने देश से निर्वासित होने के बाद बनेगें बांग्लादेश PM

•बांग्लादेश की राजनीति में प्रभावशाली हुए तारिक रहमान जियाउर रहमान और खालिदा जिया के पुत्र  

•खालिदा जिया की मृत्यु के बाद तारिक रहमान को BNP चीफ बनने के बाद पहले चुनाव में दर्ज की जीत

एनई न्‍यूज भारत, सिलीगुड़ी

पहले जेल, फि‍र निर्वासित होने के 17 साल बाद अशांत बंगलादेश में लौटे खालिद जिया के पुत्र तारिक रहमान अपने पहले चुनाव में गुरुवार को हुए मतदान में प्रचंड जीत दर्ज कर प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार बन गए। जीत के बाद तारिक रहमान बांग्लादेश के नए पीएम बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बांग्लादेश के 13वें आम चुनावों में प्रचंड जीत हासिल की है। पार्टी दो-तिहाई से अधिक का बहुमत मिला है। तारिक अब सिर्फ बांग्लादेश में लंबे समय तक शासन करने वाले परिवार के उत्तराधिकारी भर नहीं हैं, उन्होंने खुद को मौजूदा वक्त में यहां का सबसे शक्तिशाली नेता भी साबित कर दिया है। जिस बांग्लादेश से उन्हें 17 साल तक निर्वासित रहना पड़ा, अब वहां का शासन उनके हाथों में होगा. चलिए आपको कहानी बताते हैं तारिक रहमान कि जिनकी जिंगदी कि शुरुआत ही पुलिस हिरासत से हुई थी।

पूर्वी पाक में पैदा हुए थे तारिक

तारिक रहमान को बांग्लादेश की राजनीति में तारिक जिया के नाम से पहचाना जाता है। उनका जीवन और राजनीतिक पहचान काफी हद तक उनके पारिवारिक नाम से जुड़ी रही है। उनकी पहली पहचान यही है कि वो जियाउर रहमान और खालिदा जिया के बेटे हैं। उनका जन्म 1967 में उस समय हुआ था, जब बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान कहलाता था और वह पाकिस्तान का ही हिस्सा था। 1971 के मुक्ति संग्राम (बांग्लादेश की आजादी की जंग) के दौरान तारिक महज चार साल के थे और उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में भी रखा गया था। इसी वजह से उनकी पार्टी बीएनपी उन्हें “युद्ध के सबसे कम उम्र के बंदियों में शामिल” बताकर सम्मानित करती है।

तारिक रहमान के पिता जियाउर रहमान सेना में कमांडर थे और 1975 के तख्तापलट के बाद उन्होंने धीरे-धीरे सत्ता में अपनी पकड़ मजबूत की। उसी साल बांग्लादेश के संस्थापक नेता और शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान की हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद जिया और हसीना परिवारों के बीच गहरा और स्थायी राजनीतिक टकराव पैदा हो गया, जिसे आमतौर पर “बेगमों की लड़ाई” कहा जाता है। सबसे खास बात है कि यह दशकों में यह पहला चुनाव था जिसमें दोनों बेगमों में से कोई भी चुनावी मैदान में नहीं था। खालिदा जिया की मृत्यु हो गई है जबकि हसीना अब भारत में रहने को मजबूर हैं।

कुछ वर्षों बाद जियाउर रहमान की भी हत्या कर दी गई, तब तारिक रहमान की उम्र केवल 15 साल थी। इसके बाद उनका पालन-पोषण उनकी मां के साये में हुआ, जब खालिदा जिया देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। आगे चलकर सत्ता को लेकर हसीना और जिया के बीच लगातार संघर्ष चलता रहा और दोनों ने एक-दूसरे को राजनीतिक रूप से चुनौती दी। बीएनपी के अनुसार, 23 साल की उम्र में सक्रिय राजनीति में आने से पहले तारिक रहमान ने ढाका यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पढ़ाई कुछ समय तक की थी। इसके बाद उन्होंने सैन्य शासक हुसैन मुहम्मद इरशाद के खिलाफ आंदोलन के दौरान बीएनपी का दामन थामा.

2007 में गिरफ्तारी के बाद रिहा, 2008 में देश छोड़ा

तारिक रहमान को 2007 में भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। उस दौरान उन्होंने जेल में शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। रिपोर्टों माने तो सरकार ने  उनकी रिहाई राजनीति से दूर रहने की शर्त पर हुई थी। उसी वर्ष रिहा होने के बाद वे इलाज के लिए 2008 में लंदन चले गए और फिर बांग्लादेश वापस नहीं आए।

तारिक रहमान बांग्लादेश के नए पीएम बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बांग्लादेश के 13वें आम चुनावों में प्रचंड जीत हासिल की है। पार्टी दो-तिहाई से अधिक का बहुमत मिला है। तारिक अब सिर्फ बांग्लादेश में लंबे समय तक शासन करने वाले परिवार के उत्तराधिकारी भर नहीं हैं, उन्होंने खुद को मौजूदा वक्त में यहां का सबसे शक्तिशाली नेता भी साबित कर दिया है। जिस बांग्लादेश से उन्हें 17 साल तक निर्वासित रहना पड़ा, अब वहां का शासन उनके हाथों में होगा।